ई गवेर्नेंस समिति की भ्रामक स्थिती से लोक सेवा केंद्रो की निविदा प्रक्रिया खटाई में

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दमोह- पिछले दिनों पूरे मध्य प्रदेश में लोक सेवा केन्द्रों के संचालन के लिये निविदा आमंत्रित की गईं। इस प्रक्रिया के दौरान कई बार निविदा जमा करने की तारीखें बदली गईं यहां तक तो ठीक था परंतु यह मामला तब विवादित हो गया जब निविदा की शर्तों में भी परिवर्तन किया गया। यह परिवर्तन निविदा प्रक्रिया शुरू होने के बाद किया गया जिस पर अब संदेह किया जा रहा है कि क्या कोई घोटाला है जिसके चलते निविदा की शर्तों में परिवर्तन किया गया।
पूरी प्रक्रिया मे प्रमुख रूप से विवाद की स्थित तब बनी जब इसमे टेन्डर जारी होने के दो माह बाद सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम एमएसएमई को टेन्डर प्रक्रिया मे जोड़ा गया। विभाग ने माह मई में एक पत्र द्वारा एमएसएमई पालिसी पर विचार करने के निर्देश दिए और फिर तुरंत कुछ दिनों बाद एमएसएमई को लागू करने के निर्देश भी दे दिए। इसके अंतर्गत आने वाले निविदाकारों को केवल एक हजार रूपये ही लगने थे, जबकि इसके विपरीत अन्य सभी को एक लाख रूपये का डी-डी बनवा कर जमा करना जरुरी था। ये सभी संसोधन निविदा प्रक्रिया के बीच मे ही किये गए जिस पर निविदा डाल चुके निविदाकारों ने अपनी आपत्ति दर्ज भी कराई। फिर इन्होनंे लोक सेवा केंद्र की टेंडर प्रक्रिया के विरुद्ध हाई कोर्ट में रिट पिटिशन दाखिल कर दी, जिसमें हाई कोर्ट द्वारा लोक सेवा प्रबंधन विभाग भोपाल को निर्देश दिए हैं कि 31 अक्टूबर तक टेंडर प्रक्रिया मैं एलओए के आदेश जारी नहीं किये जाये।
वहीं दूसरी और यह भी खबर है कि एमएसएमई प्रक्रिया का कोई भी उल्लेख आरएफपी मे नही है। जबकि टेन्डर आरएफपी प्रक्रिया के अनुसार बुलाये गये थे। जानकार इसे भी शर्तों का उलंघन मान रहे है। टेंडर फार्म मे कही भी नेटवर्थ सर्टिफिकेट मे यूडीआईएन नंबर का जिक्र नही है, फिर भी जिला ई गवर्नेंस समिति दमोह ने कई निविदाकारो के फार्म इसी कारण निरस्त कर दिये।
इसके अलावा सबसे पहले निविदा जमा करने के लिये जो शर्ते लगाई गई उन्हे भी बार-बार शिथिल किया गया और जो पत्र या डाक्यूमेंट अनिवार्य थे उन्हें हटा दिया गया साथ ही एक पत्र में जारी निर्देशों को अगले पत्र में पलट दिया गया। एमएसएमई के पंजीयन और कुछ कागजात जैसे केंद्रों पर काम करने वाले आपरेटर के बायोडेटा जो पहले लगाना अनिवार्य थे, उन्हें बाद में हटा दिया गया।
म.प्र. भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 की कंडिका 25-3-1 में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रदेश के सूक्ष्म एव लघु उद्योगो को निविदा प्रस्तुत करने हेतु टेंडर फार्म निशुल्क उप्लब्ध कराये जायेंगे। इसी नियम के तहत एमएसएमई (सूक्ष्म एव लघु उधम ) रजिस्टर्ड फर्म से निविदा प्रक्रिया मे भाग लेने पर निविदा फार्म निशुल्क उपलब्ध कराये जाने थे परंतु जानकारी के अनुसार जिला ई गवर्नेंस समिति दमोह ने नियमो की अनदेखी कर कुछ निविदकारो के फार्म भी निरस्त कर दिये हैं। यहाँ एक बडा प्रश्न यह भी है कि एमएसएमई को लेकर जिला ई गवर्नेंस समिति द्वारा कोई भी शुद्धी पत्र जारी क्यों नही किया गया ? क्या विभाग द्वारा गोपनीय तरीके से कुछ विशेष फर्मो को लाभ देने की नियत से फार्म जमा किये गये ?
म.प्र. के समस्त जिलो ने एमएसएमई फर्म से निविदा फार्म जमा करने वाले निविदाकारो से फार्म फीस (1 हजार रूपये की डीडी) नया डीडी जमा कर पुराना डीडी वपिस लेने का आदेश हुये है जबकि दमोह लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा बताया गया है कि डीडी वापिसी के संबंध में एमएसएमई फर्मो के लिये कोई भी निर्देश नही दिये गये है। चूंकि समस्त डीडी की समय अवधि समाप्त हो चुकी है तो एमएसएमई फर्मो के डीडी को लेकर विभाग में अभी भी भ्रामक स्थिति बनी हुई है। लोक सेवा प्रबंधक श्रीमति शारदा सराफ इस पुरे मामले में लिए गए निर्णय केे लिये ई गवर्नेंस समिति के सदस्यों को जिम्मेवार मानती है व कलेक्टर दमोह द्वारा जो निर्देश जारी हुए है उसके अनुसार टेंडर प्रक्रिया कराई जाना बता रहीं है।

नितिन चौबे की रिपोर्ट