खाद, बीज, पानी, बिजली को लेकर सदन में जमकर हंगामा

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रायपुर
जैसे कि पहले ही अंदाजा था विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सदन में आज हंगामा करेगी और वही हुआ। पहले दो बार अलग-अलग समय के लिए सदन स्थगित हुआ, फिर भी जब बात नहीं बनी तो गुरुवार तक के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। किसानों के मुद्दे पर आज सदन में खूब हंगामा हुआ। विपक्ष ने किसानों से वादाखिलाफी, खाद बीज की अनुपलब्धता, बिजली की कटौती जैसे मुद्दे को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाया था। स्थगन प्रस्ताव को लेकर विपक्षी सदस्यों ने चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विपक्ष के इस स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया गया । भाजपा की तरफ से लाये गये स्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता पर भी चर्चा कराने की भी मांग सदन में हुई। इसके बाद पहले सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया। किसानों के इस मुद्दे पर जोगी कांग्रेस और बसपा ने भी भाजपा का साथ दिया।

स्थगन प्रस्ताव के मुद्दे पर दोबारा जब कार्रवाही शुरू हुई, तो उस दौरान भी जमकर हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ से जमकर नोंक-झोंक भी हुई। इसी बीच आसंदी की तरफ से स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। आसंदी से स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किये जाने के बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी के बीच ही जब विधानसभा अध्यक्ष ने ध्यानाकर्षण पर चर्चा शुरू कर दी तो विपक्ष नारेबाजी करते हुए वेल में आ गया। विधानसभा के नियम के मुताबिक वेल में आने पर विधायक स्वत: निलंबित हो जाते हैं, लेकिन भाजपा, जोगी कांग्रेस और बसपा विधायक वहीं धरने पर बैठ गये। बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद सदन से बाहर विपक्षी विधायक नहीं गये। करीब 20 मिनट तक सदन में इसी तरह का शोर शराबा चलता रहा। जिसके बाद विपक्षी के विधायकों ने बहिष्कार का ऐलान करते हुए सदन को छोड़ दिया और फिर बाद में बाहर गांधी की प्रतिमा के नीचे आकर धरने पर बैठ गये। बाहर निकले रमन सिंह ने सरकार पर किसानों के मुद्दे पर हठधर्मिता का आरोप लगाया।
किसानों की समस्या को लेकर सबसे पहले सदन में सवाल शिवरतन शर्मा ने उठया। उन्होंने किसानों की कर्जमाफी का ममला उठाते हुए इस पर स्थगन को ग्राह्य कर चर्चा की मांग की। नारायण चंदेल ने कहा पानी न गिरने से अकाल की स्थिति है, बिजली कटौती है इस पर चर्चा कराया जाए। डा. रमन सिंह ने कहा कि मानसून की असफलता से किसान दोतरफा मार झेल रहे हैं, पूरा प्रदेश विधानसभा की ओर उम्मीद से देख रहा है। आज की कार्यवाही को स्थगित कर चर्चा होनी चाहिये। अजय चंद्राकर ने कहा कि पाप का घड़ा भर गया और इंद्र देव रुठ गए। साजिश हो रही है कि बीज बाहर से मंगवकर खरीदी जाए। स्थगन पर चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच कांग्रेस विधायकों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी।

हंगामे के बाद धर्मजीत सिंह ने कहा कि पानी गिर नहीं रह है. बीज खाद और बिजली मिल नहीं रहा है, कर्जमाफी हुआ नहीं है, एक महीने के अंदर संकट आने वाला है, अगर एक भी किसान आत्महत्या कर रहा है तो सरकार को किसानों के हित की बात करने का अधिकार नहीं है। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि अलग-अलग विभाग के मसले हैं। धरमलाल कौशिक ने कहा किसान को समग्र रूप से देखें और इस पर चर्चा कराएं. बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि किसानों के लिए मानसून सत्र होता है। बिजली रहती नहीं है, किसानों को दोबारा कर्ज नहीं मिल रहे हैं, आज चर्चा नहीं होगी तो कब होगी।