गर्दन और स्पाइन की समस्याओं को दूर करता है सेतु बंधासन

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योग में पीछे झुकने वाले आसनों की पूरी शृंखला है जो विशेषकर स्पाइन और गर्दन के लिए होते हैं। अब तक खड़े होकर और बैठकर करने वाले आसन का जिक्र हुआ है। अब पीछे झुकने वाले आसनों के बारे में बताया जाएगा। इस शृंखला में सेतु बंधासन सबसे पहले आता है। सेतु का मतलब होता है पुल यानी शरीर को पुल नुमा आकार देकर एक निश्चित डिग्री में घुमाया जाए तो स्पाइन से लेकर गर्दन तक के विकारों को इससे दूर किया जा सकता है। योगाचार्य अवधेश शर्मा और योग प्रशिक्षिका शालू बिजानी इसी आसन के बारे में बता रही हैं।

ऐसे करें
– सबसे पहले जमीन पर पैर फैला कर सीधे लेट जाएं। पंजे ऊपर और हाथ शरीर से चिपके हों।
– अब हाथों को कमर के बगल में रखें। और पैरों को मोड़ लें। शरीर सीधा होना चाहिए। सिर जरा सा भी मुड़ा हुआ न हो।
– हाथ से कमर को थोड़ा उठाएं। ध्यान रहे कोहनी जमीन पर ही रहे। वहीं पैरों को फैला लें। कंधे जमीन को छूते हुए होने चाहिए।

आयंगर पद्धति से
– पहले जमीन पर लेट जाएं, उसके बाद कमर के नीचे एक छोटा स्टूल रख लें। कंधे के नीचे एक तकिया रखें और पैरों को फैला लें।
– इसमें कमर के नीचे स्टूल की जगह एक आर्कनुमा लकड़ी की बेंच का सहारा लें। जिन्हें पीठ में दिक्कत है वह इसका प्रयोग कर सकते हैं। वहीं कंधे के नीचे तकिया लगाकर पैर फैला लें।
– कंधे के नीचे एक पतला तकिया रखें। इसके बाद कमर के नीचे एक लकड़ी का गुटका रखकर कमर को उसी पर टिका दें। पैर फैला लें।

इस आसन से फायदा
यह आसन स्पाइन को पीछे की ओर मोड़कर गति देता है। विभिन्न गतिविधियों से उत्पन्न गर्दन दर्द को दूर करता है और सूचना तंत्रिकाओं को मुक्त करता है। मलाशय व पेट के अन्य अंग खिंचते हैं जिससे उनकी मालिश होती है। स्त्रियों को भी इस आसन से विशेष लाभ होता है।