घर में रखा FIRST AID भी पैदा कर सकता है वास्तु दोष

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वास्तु शास्त्र में हर उस चीज़ के बारे मे बताया गया जी मानव जीवन से संबंध रखती हैं। परंतु क्या आप जानते हैं बीमार लोगों द्वारा खाई जाने वाली दवाईयों का भी वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रभाव पड़ता है। जी हां, आपको जानकर शायद यकीन न हो लेकिन ये सच है। हम जानते हैं आपको इस तथ्य पर इतनी जल्दी विश्वास नहीं होगा। 

इसीलिए हम आपके लिए लाएं हैं पंजाब केसरी के आचार्य कमल नंदलाल द्वारा बताई ऐसी जानकारी जिससे आपको अच्छे से पता चले कि दवाईयां कैसे आपके जीवन के वास्तु को प्रभावित कर सकती हैं।

अगर वास्तविकता की बात करें तो संपूर्ण ब्रह्मांड की हर चीज़ अपना एक औरा रखती है। प्रत्येक वस्तु का अपना एक नैगेटिव और पॉज़िटिव असर होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ठीक इसी प्रकार दवाईयां भी अपने अंदर न्यूट्रल चार्ज रखती हैं यानि अच्छा बुरा दोनों तरह का प्रभाव रखती हैं। हमारे कहने का भाव ये है कि हर तरह की दवाई अपनी अंदर ऊर्जा रखती हैं फिर चाहे वो पॉज़िटिव हो या नैगेटिव।

आप में से बहुत से लोग ऐसे लोग होंगे जिनका ये प्रश्न होगा कि क्या दवाईयां वास्तु दोष पैदा करती हैं। तो आपको बता दें कि जी हां, ये वास्तु दोष पैदा करती हैं। पंडित जी बताते हैं कि अगर दवाईयों को किसी ऐसी जगह रखा जाए जो नम हो यानि ठंडी न हो तो इससे कई तरह की प्रॉब्लम्स पैदा होनी शुरू हो जाती हैं। 

आमतौर पर अगर कोई व्यक्ति दवाईयों को पूर्व दिशा में रखता है तो आपको इससे जुड़ी एक बात जाननी बहुत अनिवार्य है दवाई अपने आप में से औषध है और संपूर्ण ब्रह्मांड की जितनी भी औषधि है वो मूलत है, चंद्रमा और मंगल के बीच का कनेक्शन है। इसलिए कहा जाता है कि कभी भी दवाईयों को पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये दिशा अपने आप में बहुत ही हार्ड होती है और गर्म होती है। इसके साथ ही इसे दक्षिण-दिशा में रखना भी सही नही माना जाता।

इसे हमेशा उत्तर-पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा के किसी स्थान पर रखना चाहिए। अब दूसरा प्रशन जो हर किसी के मन में पैदा होता है इस प्रकार का वास्तु दोष पैदा होने से किस तरह की परेशानियां पैदा होती हैं। तो आपको बता दें कि इसकी वजह से सबसे बड़ी परेशानी स्वास्थ्य संबंधी आती है। पंडित जी के अनुसार मनुष्य का स्वास्थ्य सूर्य से बनता है। काल च्रक और वास्तु सिद्धांत के दृष्टि से देखें तो पूर्व दिशा जो है वो दरअसल में हमारा मस्तक है। तो अगर गलत जगह पर सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। क्योंकि कहा जाता है दवाईयां चंद्रमा के तौर पर काम करती हैं। इसके अलावा अगर दवाईयों को साऊथ-वैस्ट दिशा में रखी जाएं तो सबसे ज्यादा दिक्कत हड्डियां और जोड़ों आदि में होती हैं।

वासतु शास्त्र के अनुसार छोटी-मोटी आम दवाईयों को हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए धूप सीधा न आती हो। इसके लिए दिशा दक्षिण अच्छी रहती है। अगर ऐसा न किया जाए तो इसके कारण मनोविकार आदि जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद तीसरा प्रश्न जो आप सब के मन में आ सकता है कि क्या इस दोष का असर केवल उस व्यक्ति पर पड़ता है जिसकी दवाईयां हो या इसका असर पूरा परिवार के ऊपर पड़ता है।

तो इसका उत्तर है कि इसका प्रभाव केवल एक सदस्य नहीं बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। आप ने देखा होगा कि हमेशा लोग दवाईयों को किसी न किसी छोटे पाऊट या किट आदि में रखते हैं। लेकिन इसके पीछे का कारण आप शायद नहीं जानते होंगे। तो बता दें वो इसलिए क्योंकि दवाईयों की ऊर्जा बाहर न आए, क्योंकि कहा जाता है कि अगर दवाईयां को खुले में रखा जाए तो इसका प्रभाव घर के किसी एक सदस्य नहीं बल्कि सभी सदस्यों पर पड़ता है।

अब बात करते हैं सबसे ज़रूरी चीज़ के बारे में जो हैं FIRST AID BOX  के बारे में जो हर किसी के घर में होती ही है। क्या इससे भी वास्तु दोष पैदा होते हैं। जी हां, FIRST AID BOX  भी कहीं न कहीं वास्तु दोष का कारण बनता है। इसलिए इसे हमेशा ऐसी जगह रखा जाता है जो सबकी पहुंच में हो। और वो जगह होती है घर का लगभग वो हिस्सा जहां परिवारजन बैठकर खाना खाते हैं। या वो जगह जहां आमतौर पर सभी बैठते हों। आचार्य कमल नंदलाल के अनुसार घर की दक्षिण दिशा और उत्तर पश्चिम दिश वो दिशा है जहां FIRST AID BOX  रखा जा सकता है। इसके अलावा बस इस बात का ध्यान रखें, कभी भी दवाईयों को किचन में न रखें।