झूठे आंकड़ों के सहारे वाहवाही, सरकार की इस ‘खास’ योजना को पलीता लगा रहे बीजापुर के अधिकारी

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बीजापुर
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 145 वां ज़न्मदिवस के दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के राजपथ से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के क्लीन इंडिया के सपने को पूरा करने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत अभियान को लांच किया था. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 2 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छ भारत बनाने का वादा किया था. दरअसल 2 अक्टूबर 2019 को बापू का 150 वां ज़न्मदिवस होगा. स्वच्छ भारत एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी बापू को, इसी उद्देश्य के साथ भारत के पीएम ने स्वच्छ भारत मिशन का आगाज़ किया था. मगर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के अधिकारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी के इस सपने पर भ्रष्टाचार का किछड फेंकते नजर आ रहे है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए हज़ारों शौचालय भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गए है. टारगेट पूरा करने के उद्देश्य से अपनी जेब भरते हुए आधे-अधूरे शौचालय बनाकर ग्राम पंचायतों को ओडीएफ यानी की शौच मुक्त ग्राम पंचायत घोषित कर दिया गया है.

आपको शौचालयों के निर्माण में हुई गड़बड़ी के बारे में बताने से पहले ओडीएफ यानी ओपन डेफिकेशन फ्री क्या होता है और एक ग्राम पंचायत को शौच मुक्त ग्राम पंचायत का दर्ज़ा कैसे मिलता है, इस बारे में जानना ज्यादा महत्वपूर्ण है. दरअसल, जब किसी ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव ये दावा करते है कि उनका ग्राम पंचायत शौच मुक्त हो चुका है. तब जनपद पंचायत द्वारा एक जांच दल गठित कर संबंधित ग्राम पंचायत भेजा जाता है. इस जांच दल के रिपोर्ट को जिला पंचायत भेजा जाता है. जिला पंचायत द्वारा फिर एक जांच दल गठित कर उसी ग्राम पंचायत में निरिक्षण के लिए भेजा जाता है. जिला पंचायत के जांच दल के रिपोर्ट को राज्य सरकार के पास भेजा जाता है. राज्य सरकार द्वारा दूसरे जिले से एक जांच दल संबंधित ग्राम पंचायत भेजा जाता है. दूसरे जिले के जांच रिपोर्ट को फाइनल मानकर उस ग्राम पंचायत को ओडी एफ यानी कि शौच मुक्त ग्राम पंचायत का प्रमाण पात्र दिया जाता है. कुल मिलाकर, त्री स्तरीय जांच के बाद एक ग्राम पंचायत को शौच मुक्त ग्राम पंचायत का दर्ज़ा मिलता है.

स्वच्छ भारत मिशन के तहत बीजापुर के 4 ब्लॉक भैरमगढ़., बीजापुर, भोपालपटनम और उसूर के 103 ग्राम पंचायतों में शौचालय बनाए गए है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक इस मिशन के तहत भैरमगढ़ ब्लॉक में 6659, बीजापुर में 4904, उसूर में 2989 और भोपालपटनम ब्लॉक में 7996 शौचालय बनाए गए है. यानी कि पूरे जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 22,548 शौचालय बनाए गए. बता दें कि 1 शौचालय के निर्माण के लिए 12 हज़ार रूपए सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाती है, जिसमे से 9000 केंद्र सरकार द्वारा और 3000 रूपए राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है. इस तरह से इस मिशन में 22,548 शौचालयों के निर्माण के लिए कुल 27 करोड़ 57 लाख 6 हज़ार रूपए खर्च किए गए. केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिले टारगेट को पूरा करने के लिए जिले में 27 करोड़ 57 लाख 6 हज़ार रूपए की लागत से बनाए गए 22,548 शौचालयों के निर्माण में भ्रष्टाचार को अंजाम देते हुए बेहद ही घटिया निर्माण और लापरवाही बरती गई है.