तबादलों के सीजन में हर मंत्री का बंगला फुल, बच्चों के साथ मम्मी-पापा का डेरा

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भोपाल 
मौसम भले ही गर्मी का हो और लोग घर से बाहर निकलने में कतरा रहे हों, लेकिन भोपाल में मंत्रियों के घर पर तो मेला लगा हुआ है. यहां का सीन देखकर लग ही नहीं रहा कि आसमान से आग बरस रही है. मंत्रियों के घर पर लगे इस मेले में महिला और पुरुषों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी नज़र आ रहे हैं.

भीषण गर्मी और झुलसा देने वाली धूप भी मजबूर लोगों का हौंसला नहीं तोड़ पा रही. भोपाल में मंत्रियों के बंगले पर ये 'मज़बूर' लोग जमा हैं. दरअसल ये तबादले के तलबगार लोग हैं. किसी का ट्रांसफर हो गया है तो कोई करवाने की जुगत में आया है. कोई मनमाफिक पोस्टिंग कराने आया है तो कोई ट्रांसफर कैंसिल कराने के लिए एड़ियां घिस रहा है.

राज्य सरकार के तबादलों से प्रतिबंध हटाने के बाद सरकारी कर्मचारियों की भीड़ मंत्रियों के बंगले पर उमड़ रही है.हालांकि सरकार ने लोगों को राजधानी आने से रोकने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी है. लेकिन लोग सोचते हैं जो बात डायरेक्ट सिफारिश में है वो ऑनलाइन में नहीं बन पाती. लोग तपती गर्मी में अपना तबादला कराने के लिए मंत्रियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं.आलम ये है कि सिर्फ कर्मचारी ही नहीं बल्कि विधायक भी तबादला सीजन में अपनों की पोस्टिंग के लिए मंत्रियों के बंगलों पर डैरा डाले दिखाई दे रहे हैं.

कर्मचारी हाथ में आवेदन लिए मंत्रियों के घर परडेला डाले बैठे हैं. वो साथ में स्थानीय विधायक से लेकर प्रभारी मंत्री तक की सिफारिश लेकर आ रहे हैं. दूर-दूर की नाते-रिश्तेदारी निकाल रहे हैं कि पता नहीं कौन-सी सिफारिश काम आ जाए. महिला कर्मचारी तो साथ में अपने बच्चे तक लेकर आयी हैं.

5 -जून से 5 जुलाई- राज्य सरकार ने पांच जून से पांच जुलाई तक तबादलों को मंजूरी दी है.नई नीति के तहत जिले के अंदर प्रभारी मंत्री और एक जिले से दूसरे जिले में तबादले का अधिकार विभागीय मंत्री को सौंपा है..तबादला नीति के तहत तबादलों की संख्या भी तय कर दी गई है.

तबादला नीति

  • 200 कर्मचारी वाले कैडर में 20 फीसदी
  • 201 से 2000 तक के बीच वाले विभाग में 10 फीसदी
  • 2000 से ज्यादा संख्या वाले कैडर में पांच फीसदी कर्मचारियों के तबादले हो सकेंगे.
  • लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद पहले आईएएस,आईपीएस और अब कर्मचारी-अधिकारियों का तबादला हो रहा है.