तांत्रिक के साथ 3 साल के बच्चे की बलि देने जा रहा था परिवार, पुलिस और ग्रामीणों ने बचाया

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गुवाहाटी 

असम के शहर उदलगुरी में पुलिस और ग्रामीणों ने कथित रूप से तीन साल के बच्चे को उसके परिवार के अंधविश्वास का शिकार होने से बचा लिया। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां के कलईगांव में तीन साल के बच्चे की बलि देने के लिए तीन लोग एक तांत्रिक के साथ पूजा-पाठ कर रहे थे, लेकिन जब गांव के लोगों को इसका पता चला तो उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी। 

इसके बाद पुलिस और ग्रामीणों की मदद से शनिवार को बच्चे को बचा लिया गया, वहीं इस पूरे मामले में शामिल तीन लोगों और एक तांत्रिक को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। गांव वालों के अनुसार, नरबलि देने से पहले गांव के हाई स्कूल के टीचर जादव सहरिया अपने परिवार के लोगों के साथ बीते कई दिनों से घर में पूजा कर रहे थे। आरोप है कि इस पूजा में एक तांत्रिक समेत चार पुरुष एवं तीन महिलाएं शामिल थीं। शनिवार को नरबलि देने से पहले जादव ने अपने घर और बाइक में आग लगा दी थी और इसके धुएं को देखने के बाद ही ग्रामीणों को पूरे मामले का पता चला। 

महिलाओं ने पुलिस पर किया हमला 
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वह मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि पूजा में शामिल लोग तीन साल के बच्चे की बलि देने की तैयारी कर रहे हैं। इसपर विरोध के बीच कुछ लोगों ने बच्चे को परिवार के चंगुल से छुड़ा लिया, जिसके बाद पूजा में शामिल महिलाओं ने पुलिस एवं स्थानीय लोगों पर धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। दोनों ओर से चले संघर्ष के बीच करीब 3 घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही, जिसके बाद पुलिस ने फायरिंग कर हालात काबू में किए। 

घटना में तीन लोग जख्मी 
उदलगुरी के एसपी एल. तेरांग के मुताबिक, हालात बिगड़ता देख पुलिस ने हवाई फायर कर लोगों को रोकने की कोशिश की। इस घटना में परिवार के तीन पुरुष सदस्य घायल हो गए। एसपी ने कहा कि इस हिंसा में घायल सभी लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है और पूजा कराने वाले तांत्रिक को भी हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों एवं प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है। हालांकि ग्रामीणों के दावे के बावजूद, पुलिस इस मामले को नरबलि के केस से जोड़ने से इनकार कर रही है।