महासमुंद के विकास में रोड़ा बनी रही ये समस्याएं, लोगों में भी काफी आक्रोश

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महासमुंद
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले को वैसे तो आने वाले सालों में जल्द ही निगम का दर्जा मिलने जा रहा है. लेकिन यहां की मूलभूत सुविधाएं, यातायात व्यवस्था और शहर के मुख्य मार्ग सहित बाजार मार्गों पर अवैध कब्जाधारियों और व्यापारियों का कब्जा यहां के विकास पर दाग लगा रहे है. मालूम हो कि 90 हजार की आबादी वाला महासमुंद नगर पालिका अपनी ही दशा पर रो रहा है. 

यहां की मूलभूत सुविधा सहित बेतरतीब यातायात व्यवस्था और अवैध कब्जा मानो यहां के विकास पर न केवल रोड़ा है बल्कि शहर के विकास पर बदनुमा दाग बना हुआ है. शहर के बीचो-बीच से गुजरने वाली नेशनल हाईवे 353 सहित यहां के मुख्य और बाजार मार्गों पर कहीं अवैध कब्जाधारियों का कब्जा है तो कहीं फुटकर व्यापारी और दुकानदार अपना कब्जा किए हुए है. मुख्य मार्गों पर यातायात समस्या विकराल रूप ले चुकी है. जगह-जगह वाहनों की अवैध पार्किंग और दुकानदारों का मुख्य सड़क तक बिखरा हुआ व्यवसायिक सामान के ढेर को देखते हुए भी स्थानीय प्रशासन ने चुप्पी साध ली है. शहर में जगह-जगह अवैध कब्जों पर कार्रवाई नहीं होने से यहां के विकास कार्य भी अब अवरूद्ध होने लगे है. शहर में काफी विकराल रूप ले चुकी यातायात की अव्यवस्था को सुधारने के लिए कोई भी पहल नहीं होने से यहां के नागरिकों में भी खासा आक्रोश है.

कुछ माह पहले यहां की नगर पालिका प्रशासन और पुलिस अधिकारी ने यहां के दुकानदारों को कड़ी चेतावनी दी थी. पर इस चेतावनी का किसी भी दुकानदार पर असर नहीं पड़ा है. इसी वजह इन दिनों शहर में जगह-जगह वाहनों का लंबा जाम लग जाने से पैदल चल पाना भी कठिन हो गया है. यहां बस स्टैंड चौराहा के अलावा रायपुर मार्ग, खरियार रोड मार्ग और तुमगांव मार्ग सहित बाजार मार्ग पर दुकानदारों का बेजा कब्जा देख कर भी राजस्व अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे है. 

इस पूरे मामले में नगर पालिका के सहायक अभियंता अमन चंद्राकर का कहना है कि पहले भी नगर पालिका द्वारा दुकानदारों को नोटिस जारी किया जा चुका है. फिलहाल पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी. वहीं एएसपी देवव्रत सिरमौर का कहना है कि यातायात पुलिस द्वारा निगर को पत्र भी जारी किया गया है. व्यापारियों की बैठक भी ली गई है. ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर समझाइश दी गई है.