मोदी की सभा में पहले बीजेपी की गुटबाजी, पहले नेता प्रतिपक्ष की नहीं थी तस्वीर, देर रात बदले गए फ्लेक्स और बैनर।

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सागर लोकसभा चुनाव को लेकर सागर भाजपा में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। लगातार दो बार नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की फोटो फ्लेक्स से गायब कर यह दिखाने का प्रयास किया गया कि भाजपा प्रत्याशी नेताओं नहीं मैनेजमेंट के भरोसे चुनाव जीत जाएंगे। परंतु नेता प्रतिपक्ष की फोटो गायब रहने पर जनता और कार्यकर्ताओं से जो तीखा फीडबैक मिला उससे उन लोगों को बैकफुट पर आना पड़ा और रातों रात तस्वीर बदलना पड़ी। पार्टी के अंदर चर्चा यह भी है कि एक गुट अभी भी यह नहीं स्वीकार पा रहा है कि प्रदेश से भाजपा सरकार जा चुकी है और उन लोगों की भी प्रदेश से केंद्र की राजनीति में विदाई हो गई है जिनकी प्रदेश में एक समय तूती बोलती थी। नये दौर में नेता प्रतिपक्ष भार्गव का कद कहीं बढ़कर पूर्ववर्ती नेताओं से ज्यादा हो गया है। यही राजनीति का तकाजा होता है कि जो पद पर होता है वही पूजा जाता है। परंतु यही बात सागर भाजपा के एक गुट को खाये जा रही है। उनको अभी भी लगता है कि सबकुछ वही है जो कुछ सालों पहले था। इसी उधेड़बुन में दो बार भार्गव की फोटो हटवाकर उन्होंने यह जताने का प्रयास भी किया कि अभी भी वही परम पूज्य और अंतिम निर्णय लेने वाले हैं। परंतु सत्य का भान होने पर उन्हें यू टर्न लेना पड़ा। खैर इस जबरन के प्रपंच में ब्राह्मण मतदाता जरूर भाजपा से छिटक गये हैं, जिसका खामियाजा पार्टी को 12 मई की वोटिंग में उठाना पड़ सकता है। करीब डेढ़ लाख ब्राह्मण मतदाताओं की बेरुखी भाजपा को भारी पड़ सकती है। इसके साथ ही उन नेताजी का भविष्य भी निर्धारित होना तय है, जो इस पूरे घटनाक्रम के कारण पार्टी को संकट में डालने के कारण पार्टी आलाकमान और संगठन की नजरों में एक्सपोज हो चुके हैं। वैसे उन पर पूर्व से ही ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। 23 मई के परिणाम पक्ष और विपक्ष में रहने के साथ ही उनके भविष्य का फैसला भी हो ही जायेगा।

सत्यनारायण शुक्ला की रिपोर्ट .