मोदी राज में 2.85 फीसदी सस्ता हुआ कर्ज, फिर भी कम क्यों नहीं हुई आपकी EMI?

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नई दिल्‍ली 

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के नतीजे गुरुवार को आने वाले हैं. ऐसी संभावना है कि केंद्रीय बैंक धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए रेपो रेट में एक बार और कटौती कर सकता है. रिजर्व बैंक अगर ऐसा करता है तो इस साल लगातार छठी बार रेपो रेट में कटौती होगी.

हालांकि आरबीआई की ओर से लगातार कटौती के बाद भी बैंकों की ओर से ग्राहकों को उम्‍मीद के मुताबिक फायदा नहीं पहुंचाया जा रहा है. अगर सही ढंग से बैंक इसे लागू करें तो होम और ऑटो लोन समेत अन्‍य तरह के कर्ज काफी सस्‍ते हो जाएंगे. ऐसे में सवाल है कि आखिर क्‍यों बैंक ग्राहकों को रेपो रेट कटौती का फायदा नहीं दे रहे हैं. आइए समझते हैं पूरे मामले को…

सबसे पहले जानिए क्‍या है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है. बैंक इसी आधार पर ग्राहकों को कर्ज मुहैया कराते हैं. रेपो रेट कम होने से बैंकों को राहत मिलती है. रेपो रेट कटौती होने के बाद बैंकों पर ब्‍याज दर कम करने का दबाव बनता है. आरबीआई हर दो महीने पर होने वाली मौद्रिक नीति की बैठक में रेपो रेट की समीक्षा करता है. आरबीआई की समीक्षा का आधार मुख्‍य तौर पर महंगाई के आंकड़े और अर्थव्‍यवस्‍था की हालत होती है. अगर अर्थव्‍यवस्‍था की हालत ठीक नहीं होती है तो रेपो रेट में कटौती की संभावना बढ़ जाती है.