शहर सहित जिलेभर में ईद उल फितर का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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शहर सहित जिलेभर में ईद उल फितर का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ईद की बिषेश नमाज ईदगाह सहित विभिन्न मस्जिदों में अदा की गई इस अवसर पर मुश्लिम‌ भाईयो ने अमन चैन,एंव खुशहाली की दुआ के साथ आपसी भाईचारा बना रहे इसको लेकर छोटे उम्र से लेकर बडे लोगो ने एक दूसरे को गले मिलकर बधाईया दी एंव सिवाईयो से मुह मीठा करा मीठी ईद का पर्व मनाया,, दरअसल

ईद-उल-फितर भूख-प्यास सहन करके एक महीने तक सिर्फ खुदा को याद करने वाले रोजेदारों को अल्लाह का इनाम है सेवइयां में लिपटी मोहब्बत की मिठास इस त्योहार की खूबी है मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व न सिर्फ हमारे समाज को जोड़ने का मजबूत सूत्र है, बल्कि यह इस्लाम के प्रेम और सौहार्दभरे संदेश को भी पुरअसर ढंग से फैलाता है मीठी ईद भी कहा जाने वाला यह पर्व खासतौर पर भारतीय समाज के ताने-बाने और उसकी भाईचारे की सदियों पुरानी परंपरा का वाहक है इस दिन विभिन्न धर्मों के लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और सेवइयां अमूमन उनकी तल्खी की कड़वाहट को मिठास में बदल देती है ईद समाजी तालमेल और मोहब्बत का मजबूत धागा है,

यह त्योहार इस्लाम धर्म की परंपराओं का आईना है एक रोजेदार के लिए इसकी अहमियत का अंदाजा अल्लाह के प्रति उसकी कृतज्ञता से लगाया जा सकता है‌ दुनिया में चांद देखकर रोजा रहने और चांद देखकर ईद मनाने की पुरानी परंपरा है और आज के हाईटेक युग में तमाम बहस-मुबाहिसे के बावजूद यह रिवाज कायम है रमजान में हर सक्षम मुसलमान को अपनी कुल संपत्ति के ढाई प्रतिशत हिस्से के बराबर की रकम निकालकर उसे गरीबों में बांटना होता है। इससे समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी का निर्वहन तो होता ही है, साथ ही गरीब रोजेदार भी अल्लाह के इनामरूपी त्योहार को मना पाते हैं।