स्टूडेंट बने जवानों को गोंडी भाषा सिखा रहे सरेंडर नक्सली

0
38

दंतेवाड़ा
ग्रामीणों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने पिछले कुछ दशकों से नक्सली नेताओं ने गोंडी सीखी और ग्रामीणों से अपनी दूरी कम करते हुए जंगल में रहना शुरू किया। अफसर व जवान गांव के लोगों की न तो उनकी भाषा ठीक से समझ पा रहे और न ही उनमें घुलमिल पा रहे थे। यह कमियां दूर करने के लिए पुलिस अफसर व जवान गोंडी बोली सीखेंगे। यह स्थानीय लोगों से उनकी बोली में बात कर सकेंगे। उम्मीद है कि गोंडी में बात करने पर लोग अपने मन की बात कह पाएंगे। नक्सली संगठन कमजोर होगा।

6 महीने में 3000 से ज्यादा जवानों को स्थानीय बोली गोंडी सिखाने का लक्ष्य रखा। गोंडी पढ़ें गोंडी लिखें नाम से यह कार्यक्रम शुरू हुआ है। सोमवार को 50 जवानों की कक्षाओं से इसकी शुरुआत हुई। गोंडी बोलने की ट्रेनिंग डीआरजी में पदस्थ खुद सरेंडर नक्सली ही दे रहे। यह पहले से ही गोंडी जानते हैं। पहले दिन की कक्षा में एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव व पुलिस अफसर भी शामिल हुए। दो पालियों में कक्षाएं लगाई जा रहीं हैं। फिलहाल 50 जवान हैं बाद में संख्या बढ़ेगी। 3 महीने प्रशिक्षण होगा। टेस्ट भी होंगे। गोंडी बोली में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जवानों को एसपी सर्टिफिकेट देंगे। 

अिधकांश लोग बोलते गोंडी इसलिए सीखना जरूरी: एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया कि यहां पदस्थ होने के बाद अनुभव हुआ कि अधिकांश गांव के लोग गोंडी ही बोलते हैं। कई बार संवाद में समस्या हुई। विचार आया कि क्यों न गोंडी सीखी जाए। क्षेत्रीय बोली ही पुलिस व आमजनता के रिश्तों को और भी मजबूत कर नक्सलवाद को खत्म करने में सहयोग मिलेगा। जब्त होने वाले गोंडी में लिखे नक्सली साहित्य, पर्चे को पढ़ने में भी आसानी होगी।