हाई प्रोफाइल धान घोटाला दोषियों पर कारवाई का इंतज़ार

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दमोह – जिले के प्रसिद्ध घोटालों में से एक धान छनाई घोटाले का मामला अब ठन्डे बसते में नजर आता दिखाई पड रहा है इस घोटाले की कोई एक कड़ी नही है बड़े बड़े करीब 4 घोटालेबाजों ने इस साजिश को अंजाम दिया है। जिले के पूर्व कलेक्टर का ट्रांसफर इसी हाई प्रोफाइल घोटाले को दबाने की साजिश का हिस्सा था।

हाई प्रोफाइल धान घोटाला सामने आने के बाद इस मामले में सहकारिता बैंक, जिला आपूर्ति विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, वेयरहॉउस कारपोरेशन के लोगों द्वारा रची गई साजिश की बू साफ तौर पर नजर आ रही है।

यहाँ बता दें कि विगत वर्ष जिले के 35 उपार्जन केंद्रो में करीब 7 लाख 28 हजार क्विंटल एफएक्यु धान की खरीदा गया था। इस एफएक्यु धान को समय पर वेयरहॉउस में जमा भी कर दिया गाय था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब घोटालेबाजों की चौकड़ी को इस बार की खरीदी में कोई विशेष आर्थिक लाभ होता नही दिखा तो इन्होने एफएक्यु धान को एक माह बाद नॉन एफएक्यु धान बताना शुरू किया और अपने ऊपर के अधिकारीयों को भरोसे में लेकर बगैर टेंडर के जबलपुर की मे.अन्नपूर्णा नामक किसी कंपनी को 75 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से करीब 2 लाख 75 हजार क्विंटल धान की छनाई का ठेका दे दिया। वहीं दूसरी और इन्होने 35 धान उपार्जन केंद्र के समिति प्रबंधकों पर एक समझौता करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। खबर तो यह भी है कि इन घोटालेबाजों ने समझौते के तहत एक स्टाम्प पर धान उपार्जन वाली समितियों से लिखवाया था कि हमारी धान की छनाई की जाये। तब कुछ समिति प्रबंधक, बैंक प्रबंधन के इस दबाव के पीछे की साजिश को समझ गए और उन्होंने स्टाम्प पर लिखकर देने से मना कर दिया। तब इन पर अनेक तरह से दबाव बनाया गया और अंतत उन्हें हवालात का रास्ता भी दिखाया गया। जानकर बताते है कि इतना सब होने के बाद तात्कालीन कलेक्टर नीरज कुमार इस गड़बड़झाले को भांप गए और इनके द्वारा जबलपुर की मे. अन्नपूर्णा कंपनी द्वारा प्रस्तुत करीब 2 करोड़ 4 लाख रूपये के बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी गई। फिर शिकवा शिकायतों दौर शुरू हुआ और इस घोटाले की जाँच की गई जिसमे हर जांच में अजब गजब आंकड़े सामने आते गये।  बताया जाता है कि जिन समिति द्वारा एग्रीमेंट नहीं किया गया उन्होंने जाँच दल से अपने जबाब में स्पष्ट कहा की हमारे यहाँ किसी भी प्रकार से धान की छनाई नहीं हुई फिर भी फर्जी बिलों के हिसाब से उनकी अमानक धान की छनाई होना और उसके बाद उस धान को वेयरहॉउस में जमा भी कराना बताया जा रहा है।

जिम्मेदारों ने जिस 2 लाख 75 हजार क्विंटल धान को अमानक धान बताकर छनाई करवाना बताया गया था। खबर है कि जाँच टीम के सामने करीब 10 हजार क्विंटल से कम धान की छनाई की जानकारी सामने आई है।

किसी भी मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। किसी भी मामले में दोषियों से हानि की वसूली नहीं की गई और न ही अभी तक इन घपलेबाजों पर एफआईआर हुई। धान छनाई घोटाला के बाद कुछ यक्ष प्रश्न सामने आये है जैसे छनाई के बाद की बची अमानक धान कितनी मात्रा में थी और कहा फिकवाया गया। उसका परिवहन किसने किया,उसे किस डर से भुगतान किया गया। बगैर टेंडर प्रक्रिया के में. अन्नपूर्णा को ही ठेका देने की क्या जरूरत थी इत्यादि। इस गड़बड़झाले के बाद अधिकारी किसी तरह का जबाब देने से भी बच रहे है। अब देखना है शासन इन घपलेबाजों पर कब और क्या कारवाई करता है।