हाई प्रोफाइल धान घोटाला : सात समितियों ने एग्रीमेंट करने से किया था मना

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दमोह – जिले के सहकारिता बैंक, जिला आपूर्ति विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, वेयरहॉउस कारपोरेशन के कुछ लोगों द्वारा रची गई साजिश में साथ देने से 7 समितियों ने मना कर दिया था और एग्रीमेंट करने से भी इंकार कर दिया था।
खबर है कि एग्रीमेंट के तहत कुछ समिति प्रबंधको से दबाव में यह लिखवाया गया था, कि मेरी समिति में खरीदी गई धान की छनाई करवाने तैयार हूँ। बताया जाता है, कि उस समिति की धान की क्वालिटी बढ़िया थी, जिसे सर्वेयर द्वारा पास भी कर दिया था। लेकिन फिर भी उन समितियों की 2 लाख 75 हजार क्विंटल धान को अमानक बताया गया और अधिकारीयों से साठगांठ कर बगैर टेंडर के जबलपुर की एक कंपनी को मनमानी दर पर इस धान की छनाई का ठेका दे दिया। परन्तु विपणन समिति जबेरा 1 और 2, रोंड समिति, पुरा करौंदी, अभाना समिति, भूरी बिजौरी, और गूंजी नोनपानी समिति ने इस घोटाले में साथ देने से मना कर दिया था।
यहाँ बता दें कि जिले के 35 धान उपार्जन केन्द्रों में करीब 7 लाख 28 हजार क्विंटल एफएक्यु धान की खरीदी की गई थी। जिसे समय पर बिभिन्न वेयरहॉउस में जमा भी करा दिया था, लेकिन करीब एक माह बाद कुछ घोटालेबाजों ने इस एफएक्यु धान को नॉन एफएक्यु धान बताना शुरू किया और अपने आर्थिक लाभ के लिए चक्रव्यू की रचना करने लगे। जब इस घोटाले की खबर तत्कालीन कलेक्टर को लगी तो उन्होंने संबधित कंपनी के करीब 2 करोड़ 4 लाख रूपये के बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी।
बताया जा रहा है कि संबधित कंपनी द्वारा बिलों की फाईल में थोड़ा बहुत सुधार कर भुगतान के लिए अनेक बार कलेक्टर के सामने रख देते है, लेकिन कलेक्टर हर बार भुगतान पर रोक लगा देते है। इस धान छनाई की अलग अलग विभागों द्वारा अनेक बार जाँच करवाने पर हर एक बार धान छनाई की मात्रा घटती जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस 2 लाख 75 हजार क्विंटल धान को अमानक बता कर छनाई का ठेका दिया गया था जिसमे 2 करोड़ 4 लाख रूपये के बिल भी प्रस्तुत किये गए थे उसकी जाँच में समितियों से कथन के अनुसार 10 हजार क्विटल से भी कम धान की छनाई की जानकारी जाॅच टीम के सामने आई हैं।