हॉन्ग कॉन्ग के प्रदर्शनकारियों को चीन ने बताया, ‘आतंकियों जैसा’

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हॉन्ग कॉन्ग
हॉन्ग कॉन्ग में नए प्रत्यर्पण बिल पर विरोध हिंसक स्तर तक पहुंच चुका है। एक युवा शख्स पर भीड़ ने चीन का अंडरकवर एजेंट होने के शक में हमला कर दिया। चीन ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शर्म करार दिया है। चीन ने इसे आतंकी घटना जैसा करार दिया है। ची की इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर एक समूह का स्वतंत्रता सेनानी दूसरे के लिए आतंकी भी हो सकता है बहस को ताजा कर दिया है। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और इसका विश्व में लंबा इतिहास रहा है।

हॉन्ग कॉन्ग की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया
हॉन्ग कॉन्ग में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने एक शख्स की बेरहमी से पिटाई कर दी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित खबर के अनुसार, भीड़ ने चीन का अंडरकवर होने की शक में शख्स के केबल तार से हाथ-पैर बांधकर पिटाई कर दी। चीन के सरकारी प्रकाशन ग्लोबल टाइम्स ने घटना पर नाराजगी जताते हुए पीड़ित शख्स को अपना रिपोर्टर बताया। प्रदर्शनकारियों ने इसके बाद घटना पर अफसोस जताते हुए हमले के लिए माफी मांग ली। हालांकि, चीन की मीडिया ने इस पर बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। ग्लोबल टाइम्स ने इस घटना को हॉन्ग कॉन्ग में निवेश और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। एक अन्य रिपोर्ट में इसे आंतकी वारदात जैसा करार दिया गया।

चीन का लोकतांत्रिक ताकतों पर आघात का इतिहास
यह कोई पहली बार नहीं है जब चीन को लोकतंत्र कुचलने के लिए विरोध का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले भी स्वायत्तता के लिए संघर्ष को चीन ने आतंकवाद का नाम दिया है। तिब्बत को चीन के प्रभुत्व से मुक्त करने के दलाई लामा के मिशन को चीन ने आतंकी हिमाकत का दर्जा दिया है। चीन में प्रदर्शनकारियों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की खबर भी जब-तब आती रहती है। चीन कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को भी आतंकवादी ही नाम देता रहा है।

म्यांमार ने भी रोहिंग्याओं पर हिंसा को आतंक के खिलाफ कार्रवाई कहा था
स्वतंत्रता सेनानी या आतंकी का विरोधाभास सिर्फ चीन तक ही सीमित नहीं है। 2011 में म्यांमार में रोहिंग्याओं पर हिंसक बल प्रयोग को मयांमार की सेना ने जायज ठहराया था। म्यांमार सेना का कहना था कि उन्होंने सिर्फ आतंकियों को निशाना बनाया है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन करार दिया था। संयुक्त राष्ट्र ने इसके लिए, 'एक संप्रदाय के खात्मे का उदाहरण' करार दिया था।

फलस्तीन के कैदियों को इजरायल कहता है आतंकी
इजरायल अपने देश की जेल में बंदल फलस्तीनियों को आतंकी को कहता है। हालांकि, फलस्तीन प्रशासन लगातार इसका खंडन करता रहा है। गज़ा पट्टी पर मौजूद संगठन हमास को अंतरराष्ट्रीय संगठन ने आतंकी संगठन करार दिया है। यरुशलम पोस्ट के अनुसार, 1967 से अब तक इजरायल की जेल में लाखों फलस्तीनी कैदी बंद हो चुके हैं।

नेल्सन मंडेला, भगत सिंह को भी आतंकी कहा गया
विश्व की कई महान हस्तियों को भी एक दौर में आतंकी करार दिया जा चुका है। 1993 में नेल्सन मंडेला को नोबेल का शांति पुरस्कार दिया गया था। हालांकि, अमेरिका की वॉचलिस्ट में 2008 तक मंडेला आतंकी के नाम से दर्ज थे। भारतीयों के लिए भगत सिंह राष्ट्रवादी और महान स्वतंत्रता सेनानी थे। हालांकि, ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें आतंकी करार दिया। कई बार सामाजिक आंदोलनों को भी एक दौर में राष्ट्रविरोधी कहा जा चुका है। सामाजिक अधिकारों के महान सुधारक मार्टिन लूथर किंग पर भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने उनके खिलाफ जांच टीम भी लगाई थी।