13 सालों में पहली बार घटी स्कूटर की बिक्री

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नई दिल्ली 

नौकरियों की कमी एवं ग्रामीण तथा छोटे शहरों/कस्बों में बढ़ती आर्थिक परेशानियों ने अब ऑटो इंडस्ट्री पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले 13 सालों में पहली बार स्कूटर की बिक्री घटी है। वहीं पैसेंजर वीकल सेगमेंट, जैसे कारें और स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीकल ने पिछले 5 साल में सबसे धीमी बढ़त दर्ज की है।  
 
देश में बिकने वाले कुल दोपहिया वाहनों में करीब एक तिहाई स्कूटर्स होते हैं। 2018-19 में स्कूटर्स की 67 लाख यूनिट बिकीं। पिछले साल बिकीं 67.2 लाख यूनिट के मुकाबले बिक्री 0.27 प्रतिशत घटी है। 

पिछले कुछ सालों में जिस कैटिगरी को टू-वीलर सेगमेंट की बिक्री में उछाल का श्रेय दिया गया था, वह वित्त वर्ष 2005-06 में धड़ाम हुई थी। उस समय इसकी बिक्री में 1.5 प्रतिशत की कमी देखी गई थी। बात करें मोटरसाइकल सेगमेंट की तो पूरे वित्त वर्ष में करीब 8 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ इसने बढ़िया प्रदर्शन किया, लेकिन परेशानी यहां भी दिख रही है। 

नौकरियों की कमी से कम हो रही बिक्री 
पिछले कुछ महीनों के दौरान मोटरसाइकल सेगमेंट को भी बाजार में संघर्ष करना पड़ रहा है और इस साल जनवरी से सेल घटी है। हीरो मोटो, होंडा मोटरसाइकल और स्कूटर इंडिया (HMSI) तथा टीवीएस जैसी कंपनियों ने उत्पादन और डीलर डिलीवरी कम कर दी है। कंपनियों को टू-वीलर सेगमेंट से जुड़ी यह नई सच्चाई अब दिखने लगी है। 

नए वित्त वर्ष के लिए इंडस्ट्री बॉडी सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (Siam) एक रुढ़िवादी लेकिन गंभीर विचार के साथ सामने आई है। 2018-19 में पैसेंजर वीकल में 2.7 फीसदी की ग्रोथ के साथ 2019-20 में बढ़त 3 से 5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। टू-वीलर्स की बिक्री में 5-7 प्रतिशत ग्रोथ होने का अनुमान है। 2018-19 में भी 5 फीसदी बढ़त का अनुमान लगाया गया था। 

सियाम के अध्यक्ष राजन वढेरा का कहना है, 'देश में नौकरियों की मौजूदा स्थिति उन कुछ कारणों में से एक है जिसके चलते पैसेंजर वीकल्स इंडस्ट्री की ग्रोथ को प्रभावित किया है।' वढेरा महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव बिजनस के भी प्रेजिडेंट हैं। उन्होंने कहा कि चुनावों एवं इंश्योरेंस तथा ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी खरीदारों को बाजार से दूर रखा। 

राजन के विचारों से इंडस्ट्री विश्लेषक और कंसल्टंसी फर्म एवेंटम अडवाइजर्स के एमडी वीजी रामाकृष्णन ने भी सहमति जताई। उन्होंने कहा, 'नौकरियों पर पड़ रहे असर को भी अभी तक बहुत कम आंका गया है। जीएसटी के बाद, कई असंगठित सेक्टर बंद हो गए और बहुत सारी कंपनियां भी कम हो गईं। आईटी सेक्टर में स्लोडाउन और टेलिकॉम सेक्टर में छिड़ी जंग से न केवल रोजगार में कमी आई, बल्कि इससे नौकरी कर रहे लोगों के मन में भी अनिश्चितता घर कर गई। ऐसे में लोग पैसा होने के बावजूद नई चीजें न खरीदकर उन्हें पोस्टपोन कर रहे हैं।'