14 महीने गुजरने के बाद भी भुगतान पाने दर दर की ठोकरे खाते फिर रहे किसान

0
126

पन्ना /गुनौर :
मामला- मई 2018 में समर्थन मूल्य में बेची गई फसल का
सन 2018 में म प्र सरकार द्वारा किसानों को फसल का सही दाम दिलाने हेतु समर्थन मूल्य घोषित कर सरकारी खरीदी केंद्रों में चने मसूर की फसल खरीदी गई और किसानों को फसल की मात्रा और कुल भुगतान की रसीद देकर 7 दिन में भुगतान का लेख किया गया था।

शासन-प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे किसान
मई 2018 में पन्ना जिले के समर्थन मूल्य के खरीदी केंद्रों पर फसल बेंचने वाले हजारो किसानों का भुगतान लटक गया था,बैंक से लेकर आला अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद लगभग 1 साल बाद कुछ किसानों का भुगतान तो मिल गया लेकिन सैकड़ो किसान 14 महीने गुजरने के बाद भी भुगतान पाने बैंक से लेकर आला अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियो के दर पर अपनी समस्या लेकर घूमते फिर रहे लेकिन भुगतान अभी भी नहीं मिल सका ।14 महीने बाद भी भुगतान न मिलने से गरीब किसान अब अपनी फसल का भुगतान पाने की आशा छोड़कर थक हारकर घर बैठ गए है।

मीडियाकर्मियों ने गरीब किसानों का कई बार उठाया मुद्दा
पन्ना के क्षेत्रीय मीडिया कर्मियों ने गरीब किसानों से रूबरू होने के बाद लंबित भुगतान के मामले को कई बार उठाया जिसके बावजूद कुछ किसानों का भुगतान तो हुआ लेकिन सैकड़ो किसान अभी भी अपनी चने मसूर की फसल का भुगतान पाने दर दर की ठोकरे खाते फिर रहे।

किसानों ने पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी को दिया था ज्ञापन
मई 2018 में अपनी चने मसूर की फसल सरकारी खरीदी केंद्रों में बेंचने के बाद भुगतान पाने के लिए दर दर की ठोकरे खाने के बाद भी भुगतान न होने से पीड़ित किसानों ने लगभग 4 महीने पहले पहले पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी को ज्ञापन दिया था मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी मंत्री ने भुगतान दिलाने का आश्वासन तो दिया था लेकिन 14 महीने गुजरने के बाद अभी तक किसानों का भुगतान लंबित है।

किसानों के मामले में न तो जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासन दिख रहा गंभीर
लच्छेदार भाषणों और बातों में तो सभी जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अमला किसान हितैषी होने का स्वांग रचते है लेकिन पन्ना जिले के किसानों का 14 महीने बाद भी भुगतान न होना जनप्रतिनिधियो की लच्छेदार भाषण शैली और प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है और शासन प्रशासन की किसानों के प्रति गंभीरता पर सवालिया निशान लगा रहा है।